संस्था के बारे में

सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना 01-07-1991 में हुई। 50 भैया/बहिन एवं 03आचार्य/दीदी एवं 01 सेवक को लेकर यह नन्हा सा बीज रोपित किया गया। इस विद्यालय में प्रथम प्रधानाचार्य के रुप में श्री प्रहलाद जी शर्मा (नरसिंहगढ़) की पदस्थापना 01-10-1991 को हुई एवं एवं 26 मार्च 1992 को विद्यालय को मान्यता प्राप्त हुई तब से लेकर आज तक यह विशाल वट वृक्ष का आकार ले चुका है।

                विद्यालय स्थापना के आधार स्थम्भों में नगर के प्रमुख समाज सेवियों ने अपना तन-मन-धन लगाकर इसे स्थापित किया जिसमें ओमप्रकाश जी गुप्ता] ओमप्रकाश जी सेठिया] राधेश्याम जी पाटीदार(जीयाजी सा.)]दिनेश जी पाटीदार] दिनेश जी टाँक] वीरेन्द्र कुमार जी रामपुरिया] श्यामलाल जी नागर आदि प्रमुख रहे। इनमें श्री राधेश्याम जी पाटीदार ने अपनी स्वयं की भूमि दान में देकर विद्यालय के स्वयं का भवन निर्माण का सपना पूरा कर लिया। स्व. श्री राधेश्याम जी पाटीदार का विद्यालय सदैव ऋणी रहेगा।

**विद्यालय की वर्तमान स्थिति**

1991 में रोपित यह नन्हा-सा पौधा आज विशालकाय वट वृक्ष का रूप लेकर खड़ा है। विद्यालय में वर्तमान में 30 कक्ष] 01 कार्यालय कक्ष] विशाल सभागृह एवं15 शौचालय एवं स्नानागार है।

        सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान की क्रियाशील शिशु वाटिका का अलग भवन निर्माण कर सत्र 2016-17 में कक्षाएं प्रारम्भ की जा चुकी है। जिसमें 102नन्हें – मुन्हे शिशु अध्ययनरत हैं। शिशु वाटिका में भैया/बहिनों के लिये फर्नीचर की व्यवस्था की गई है। विशाल मैदान] तरणताल(स्वीमिंग पुल)] झुले] सायकिल आदि सम्पूर्ण सामग्री उपलब्ध है।

        शिशु वाटिका भवन के सामने यज्ञशाला निर्माण किया गया है। जिसमें प्रतिदिन भैया/बहिन हवन करते है। विद्यालय में संगीतमय प्रार्थना होती है। संगीत वाद्य यंत्रों की पूर्ण व्यवस्था है।

विद्यालय में वर्तमान सत्र 2019-20 में 1138 भैया/बहिन अध्ययनरत है।